रायपुर । छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से हर साल करोड़ों रुपए का बजट मिल रहा है, लेकिन इसका उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। समग्र शिक्षा के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में केंद्र से जारी 1607.24 करोड़ रुपए में से 690.77 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं हो सके। यह स्थिति तब है, जब दूसरी ओर विभाग के पास कर्मचारियों के वेतन और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र से जारी 776.59 करोड़ रुपए में से 312.25 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए जा सके। इसी तरह 2024-25 में जारी 830.65 करोड़ रुपए में से 378.52 करोड़ रुपए की राशि बिना खर्च के रह गई। यानी लगातार दो वित्तीय वर्षों में कुल आवंटित राशि का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में नहीं लाया जा सका। वहीं पिछले साल का हिसाब लंबित ही है।993 करोड़ के उपयोग का हिसाब भी लंबितवित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार की ओर से समग्र शिक्षा के लिए 993.40 करोड़ रुपए जारी किए गए, लेकिन इस राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र को प्रस्तुत नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपयोगिता प्रमाण पत्र के अभाव में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जारी राशि का कितना हिस्सा खर्च हुआ और कितना शेष है। इसके साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष का बजट भी तीन माह पहले ही जारी हो गई है। उसके बाद भी छत्तीसगढ़ में बजट का अभाव देखा जा सकता है।
– बजट होने के बावजूद कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं
एक तरफ समग्र शिक्षा की ओर से अपना पूरा बजट ही खर्च ही नहीं किया जा सका है। दूसरी तरफ समग्र शिक्षा के कर्मचारियों को तीन माह की सैलरी भी नहीं मिली है। साथ ही कार्यालय के चलाने के लिए भी बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। कुछ अधिकारियों के अनुसार, परियोजनाओं के संचालन के लिए भी राशि की कमी नहीं दी गई है। समग्र शिक्षा का बजट सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए उपयोग किया जाना है। इसके उलट करोड़ों रुपए खर्च उपयोग नहीं कर पाना और दूसरी ओर जरूरी मदों में राशि की कमी सामने आना विभागीय योजना और वित्तीय क्रियान्वयन के बीच तालमेल की कमी को स्पष्ट करती है।
– कार्यालय के लिए कोई बजट नहीं
रायपुर समग्र शिक्षा के एक अधिकारी ने बताया कि जिले के किसी भी समग्र शिक्षा कार्यालय में किसी प्रोजेक्ट के लिए कोई भी बजट जारी नहीं की गई है। जिसके कारण कार्यालय काम भी ठप्प है। इसके साथ ही कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी भी वेतन रुकी है। जिसके कारण कर्मचारियों को काम करने में भी समस्या हो रही है। कई कर्मचारी काम छोड़ने पर विचार कर रहे है। इस विषय पर जब समग्र शिक्षा के उप संचालक एक सारस्वत ने कहा कि बजट दो-तीन माह पहले ही जारी हो गई है। सिंगल नोडल एजेंसी स्पर्श के कारण ही कर्मचारियों की सैलरी अटकी हुई है। जल्द ही सभी को सैलरी मिल जाएगी।

कर्मचारियों का आंदोलन की चेतावनी
राज्य में समग्र शिक्षा योजना के तहत 33 जिलों में कार्यरत लगभग 150 कर्मचारियों को पिछले नौ महीनों से गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच उन्हें केवल तीन बार ही वेतन का भुगतान किया गया है। लंबे समय से वेतन रुकने के कारण कर्मचारियों को अपने दैनिक खर्च और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि हर तीन महीने में एक बार वेतन देने की एक अनुचित परिपाटी बन गई है। नियमित मानदेय न मिलने से कर्मचारियों में गहरा मानसिक तनाव व्याप्त है और इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य तथा पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। कर्मचारियों ने कहा है कि यदि जल्द ही नियमित वेतन व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



