रायपुर । राज्य में जल्द ही होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड लागू किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। शुरुआती तौर पर इसको पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। उसके बाद राज्य भर में लागू किया जाएगा। पायलेट प्रोजेक्ट के लिए हर जिले से 3-3 हायर सेकेंडरी स्कूलों का चयन किया गया है। जहां शुरुआती तौर पर कार्ड को लागू किया जाएगा। यानी के राज्य के 33 जिलों में 99 स्कूलों में इसे लागू किया जा रहा है।
खास बात यह है कि होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड इसी सत्र से स्कूलों में लागू किया जा रहा है। अभी केवल कक्षा 9वीं में ही इसे लागू किया जा रहा है। इन 99 स्कूलों में कक्षा 9वीं के 12 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पायलट प्राजेक्ट में शामिल होंगे। एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे के ज्ञानात्मक, भावनात्मक और मनोज्ञात्मक क्षेत्रों का विकास एवं मूल्यांकन में कोलेस्टिक प्रोग्रेस कार्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। यह शिक्षकों को सतत सिखाने और बच्चों को सतत सीखने के लिए प्रेरित करेगा।
– 99 स्कूलों के प्राचार्यों को दी गई ट्रेनिंग
छत्तीसगढ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को लागू करने के लिए से पहले जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूलों के प्राचार्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। जहां उन्हें होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को कैसे उपयोग जाना है और इसके फायदों के बारे में पूरी जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया। इसके लिए मंडल कार्यालय में राज्य स्तरीय होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड प्रशिक्षण सहकार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला में रोजाना 11-11 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी और जिले से पायलेट प्रोजेक्ट के तहत चयनित 3-3 हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य प्रशिक्षण में शामिल हुए।- छात्र खुद, सहपाठी और पैरेंट्स भी देंगे फीडबैकहोलेस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत इसे एनसीईआरटी (एनसीईआरटी) के आकलन नियामक परख द्वारा विकसित किया गया है। इसमें शिक्षक के साथ-साथ छात्र खुद, उनके सहपाठी और माता-पिता भी फीडबैक देते हैं।
– 360 डिग्री विद्यार्थी मूल्यांकन रिपोर्ट
परख कोआर्डिनेटर डॉ प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड विद्यार्थियों के मूल्यांकन का नया तरीका है। यह 360 डिग्री विद्यार्थी मूल्यांकन रिपोर्ट है। यह पारंपरिक अकादमिक शिक्षा से परे जाकर विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और संपूर्ण विकास को समाहित करता है। प्रोजेेक्ट शुरू होते ही विद्यार्थियों के होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड भी बनवाए जाएंगे।




