रायपुर। विकासखंड शहरी स्रोत समन्वयक (समग्र शिक्षा) कार्यालय में संकुल समन्वयकों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं के तत्काल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
बैठक के दौरान समग्र शिक्षा के अर्बन क्लस्टर रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (URCC) नरेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी अमित तिवारी एवं सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी वंदना शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति में संकुल केंद्र वार योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने कहां कि यदि कोई विद्यार्थी अपने पाठयपुस्तक पढ़ने में असमर्थ है तो उसकी सीधी जवाबदेही संबंधित शिक्षक की होगी। उन्होंने सभी को बच्चों का सतत मूल्यांकन करने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक में विशेष शिक्षिका डॉ. गार्गी पाण्डेय, मनोज अटेरिया समन्वयक अमोल शर्मा , सुधीर सिंह ठाकुर, मोहम्मद उजैर, आकाश जोशी, जुबैर नौशाद, पवन साहू, दीपक बढ़ई, रजनी झा, पिंकी यादव, छत्रपाल शर्मा, टेकेश्वर चंद्राकर, विनय कुमार त्यागी, तरुण देवांगन, नीरज गुप्ता, विनय कृष्ण सरकार, जगन्नाथ यादव, दीपक कुमार प्रधान तथा परशुराम छुरासहित अन्य संकुल समन्वयक उपस्थित रहे।

प्रमुख निर्देश एवं निर्णय
डिजिटल डाटा एवं फ्लैगशिप योजनाएं: टीचिंग सामग्री लें, प्रत्येक संकुल केंद्र वार यू-डाइस डाटा, प्रशस्त ऐप तथा इंस्पायर अवॉर्ड से संबंधित डाटा प्रविष्टि और अपडेटेशन कार्य को अविलंब पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए गए।
निजी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण:शहरी क्षेत्र में शासन से मान्यता प्राप्त संचालित सभी निजी शिक्षण संस्थानों का संकुल समन्वयकों द्वारा नियमित अवलोकन/निरीक्षण करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट/प्रतिवेदन वरिष्ठ कार्यालय को भेजने के निर्देश जारी किए गए।
भाषा शिक्षण और शिक्षकों की जवाबदेही: सरकारी प्राथमिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा वार प्रत्येक बच्चे में हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा के वाचन (पढ़ने) की क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्राथमिक स्तर का कोई छात्र अपनी पाठ्यपुस्तकें पढ़ने में असमर्थ पाया जाता है, तो संबंधित भाषा शिक्षक की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
सघन मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन:समन्वयकों को ताकीद की गई कि वे नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रत्येक बच्चे का सतत मूल्यांकन सुनिश्चित करें, ताकि शैक्षणिक स्तर में गुणात्मक सुधार लाया जा सके।



