EducationUncategorizedछत्तीसगढ़

CG स्कूल मान्यता : नई शर्त से बढ़ी मुश्किलें, मान्यता तो दूर अनुभवी शिक्षकों की भी जा सकती है नौकरी

सीजीबीएसई के नियम से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक जुटाना चुनौतीपूर्ण, 12वीं से पीजी तक अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य

रायपुर । छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी माध्यम विद्यालय शुरू करने की तैयारी कर रहे अशासकीय स्कूल संचालकों के सामने अब शिक्षकों की पात्रता बड़ी चुनौती बन गई है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजीबीएसई) ने अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की मान्यता एवं संबद्धता से जुड़े नियमों में शिक्षकों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी शर्त जोड़ी है, जिसके तहत शिक्षक का 12वीं से लेकर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होना अनिवार्य बताया गया है। स्कूल संचालकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस शर्त के कारण खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में नए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए योग्य शिक्षक जुटाना बेहद मुश्किल हो गया है। जानकारों के अनुसार, अंग्रेजी विषय के अनिवार्यता के नए नियमों के कारण पूरे प्रदेश में अभी तक का विद्यालयों को मान्यता नहीं मिल पाई है। वहीं सालों से काम कर रहे अनुभवी शिक्षक की नौकरी पर भी संकट छा गया है।

– राष्ट्रीय बोर्डों में देखी जाती है शिक्षक की दक्षता, ज्ञान और अंग्रेजी में अध्यापन क्षमता

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर सीबीएसई और सीआईएससीई की संबद्धता व्यवस्था में शिक्षकों के लिए विषयवार शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं पर जोर दिया जाता है। सीबीएसई और सीआईएससीई जैसे राष्ट्रीय बोर्डों में भी शिक्षक की दक्षता, विषय-ज्ञान और अंग्रेजी में संप्रेषण/अध्यापन क्षमता देखी जाती है, न कि सभी पूर्व डिग्रियों का अंग्रेजी माध्यम होना।

– स्कूल एसोसिएशन ने रखी मांग

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र लिखकर मांग की गई है कि पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को इस नियम से पूर्ण छूट दी जाए, पूर्ण डिग्रियों की अनिवार्यता के स्थान पर “अंग्रेजी माध्यम में अध्यापन दक्षता” का लिखित/मौखिक परीक्षण अथवा कार्य-अनुभव को मान्यता का आधार बनाया जाए और नवीन नियमों को लागू करने हेतु कम से कम 3 से 5 वर्षों की छुट प्रदान की जाए।

– दक्षता से ज्यादा माध्यम पर जोर का सवाल

जानकारों के अनुसार, किसी शिक्षक की अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने की क्षमता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि उसने अपनी पूरी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की है या नहीं। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने स्कूल या उच्च शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की है, लेकिन विषय पर मजबूत पकड़ के साथ अंग्रेजी में पढ़ाने में सक्षम हैं। नई शर्त लागू होने पर ऐसे शिक्षक पात्रता के दायरे से बाहर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यहां 12वीं से लेकर स्नातकोत्तर तक लगातार अंग्रेजी माध्यम से पढ़े शिक्षकों की उपलब्धता पहले ही सीमित है। ऐसे में नए स्कूलों को प्रत्येक विषय के लिए निर्धारित शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले शिक्षक उपलब्ध कराना चुनौती बन सकता है।

– नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया पर असर

अशासकीय विद्यालय संचालकों का कहना है कि स्कूल की मान्यता के लिए शिक्षक नियुक्ति की शर्त पूरी नहीं होने पर पूरी मान्यता प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर उन संस्थानों पर पड़ सकता है जो आने वाले सत्र में अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं शुरू करना चाहते हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक की विषय विशेषज्ञता, अंग्रेजी में पढ़ाने की क्षमता और विद्यार्थियों के साथ संप्रेषण कौशल को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए। यदि पूर्व की पूरी शैक्षणिक को अंग्रेजी माध्यम से होना अनिवार्य कर दिया जाता है तो उपलब्ध शिक्षक वर्ग का बड़ा हिस्सा बाहर हो जाएगा।

– सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के सामने संकट

इस नियम को लेकर सवाल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लेकर उठाया जा रहा है। राज्य के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शिक्षा का माध्यम हिंदी है। अंग्रेजी माध्यम की सरकारी स्कूल व्यवस्था सीमित है, जबकि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की संख्या बढ़ाने की नीति के साथ शिक्षक पात्रता में पूरी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होने की शर्त रखी जा रही है। इसका प्रभाव यह हो सकता है कि हिंदी माध्यम से पढ़कर शिक्षक बनने की तैयारी करने वाले विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता पूरी न कर पाएं। आत्मानंद स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए भी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम मांगा जाता है। जिससे रोजगार के अवसर भी कम हो रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *