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पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, फेमस बस्तर बैंड के हैं संस्थापक

रायपुर । छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी और पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। इस सम्मान ने प्रदेश के कला जगत में खुशी की लहर दौड़ा दी है। अनूप रंजन पांडेय बस्तर बैंड के संस्थापक हैं और लंबे समय से लोक कला, संगीत और रंगमंच के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाई है। उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदेश की लोक संस्कृति के लिए भी गर्व का क्षण माना जा रहा है।

हबीब तनवीर के साथ किया काम

21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय का कला के प्रति लगाव बचपन से ही था। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और अपने ज्ञान को लोक परंपराओं के संरक्षण में लगाया। 1988 में उनकी मुलाकात सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से हुई। इसके बाद 1990 में वे ‘नया थियेटर’ से जुड़े और यहीं से उनके कलात्मक सफर को नई दिशा मिली। इस मंच के जरिए उन्होंने देश और विदेश में अनेक प्रस्तुतियां दीं।

143 लोकगीत व कथाओं का संग्रह और दुर्लभ वाद्ययंत्रों संरक्षण

अनूप रंजन पांडेय ने छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने 143 लोकगीतों और लोककथाओं की पांडुलिपियों का संकलन किया, जो लोक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने पारंपरिक और दुर्लभ वाद्ययंत्रों को संरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए। उनके संग्रह में शामिल कई दुर्लभ वाद्ययंत्र उन्होंने रायपुर संग्रहालय को दान भी किए हैं। अनूप रंजन पांडेय ने जनजातीय कलाकारों के सहयोग से ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की। यह बैंड 60 से अधिक दुर्लभ वाद्ययंत्रों से सुसज्जित है और “बंदूक की बजाय ढोल चुनें” जैसे संदेश के साथ बस्तर में शांति और संस्कृति का प्रचार करता रहा है।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान

लोककला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।उन्हें दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान सहित कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। 2019 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा था।

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