रायपुर कृषि विश्वविद्यालय को बेस्ट सोयाबीन रिसर्च सेंटर का नेशनल अवॉर्ड
रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। विश्वविद्यालय में संचालित सोयाबीन अनुसंधान केंद्र को वर्ष 2023-2025 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है।यह सम्मान अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन) के तहत दिया गया। पुरस्कार प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद में आयोजित 56वीं वार्षिक बैठक के दौरान प्रदान किया गया।

वैज्ञानिकों की टीम ने हासिल किया अवॉर्ड
यह पुरस्कार विश्वविद्यालय की टीम के डॉ. सुनील कुमार नाग, डॉ. रामा मोहन सावु और डॉ. ऐश्वर्या टंडन ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में कई राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।
रायपुर केंद्र को यह अवॉर्ड कई क्षेत्रों में बेहतर काम के लिए मिला, जिसमें—
अनुसंधान परीक्षण
नई किस्मों का विकास
वैज्ञानिक शोध पत्रकिसानों के लिए प्रशिक्षण और कार्यक्रम
बीज उत्पादन
3 साल लगातार सभी परीक्षण सफल
केंद्र ने लगातार तीन वर्षों तक पादप प्रजनन, खेती विज्ञान, रोग प्रबंधन और सूक्ष्मजीव विज्ञान जैसे क्षेत्रों में सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र, बुलेटिन और छात्रों के मार्गदर्शन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
नई किस्में और तकनीक विकसित
केंद्र ने आएससी 11-42, आएससी 11-72 और आएससी 12-32 जैसी बेहतर सोयाबीन किस्मों के विकास में प्रगति की।
इसके अलावा—
3 नई उन्नत किस्में विकसित
6 नई उत्पादन और संरक्षण तकनीक
3 जर्मप्लाज्म लाइन का पंजीकरण
हर साल 100 से ज्यादा किसान डेमोकिसानों तक तकनीक पहुंचाने के लिए हर साल 100 से ज्यादा फील्ड डेमो किए गए। कांकेर जिले में जनजातीय किसानों के लिए विशेष योजनाओं के तहत भी काम किया गया।
बीज उत्पादन में भी अच्छा प्रदर्शन
केंद्र ने प्रजनक बीज उत्पादन में करीब 90% लक्ष्य हासिल किया। साथ ही न्यूक्लियस बीज उत्पादन में भी उल्लेखनीय सफलता मिली।
जलवायु के अनुसार खेती और नई तकनीक
केंद्र ने ज्यादा उत्पादन और रोग प्रतिरोधक किस्मों के साथ-साथ पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और जलवायु के अनुकूल खेती पर भी काम किया।
नई तकनीकों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन सुधारने में मदद मिली है।
वैज्ञानिकों को अलग से भी सम्मान
डॉ. सुनील कुमार नाग को सोयाबीन रिसर्च में योगदान के लिए “फेलो-2025” सम्मान मिला। वहीं डॉ. तापस चौधरी को नई तकनीक विकसित करने के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें बीज उपचार के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर काम किया गया है।
2001 से चल रहा है यह केंद्र
रायपुर में यह सोयाबीन अनुसंधान केंद्र वर्ष 2001 से संचालित है और देशभर में सोयाबीन उत्पादन बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में काम कर रहा है।
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम के लगातार प्रयास और किसानों के लिए किए जा रहे काम का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
रायपुर केंद्र को यह अवॉर्ड कई क्षेत्रों में बेहतर काम के लिए मिला, जिसमें—अनुसंधान परीक्षणनई किस्मों का विकासवैज्ञानिक शोध पत्रकिसानों के लिए प्रशिक्षण और कार्यक्रमबीज उत्पादन3 साल लगातार सभी परीक्षण सफलकेंद्र ने लगातार तीन वर्षों तक पादप प्रजनन, खेती विज्ञान, रोग प्रबंधन और सूक्ष्मजीव विज्ञान जैसे क्षेत्रों में सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए।इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र, बुलेटिन और छात्रों के मार्गदर्शन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।नई किस्में और तकनीक विकसितकेंद्र ने आएससी 11-42, आएससी 11-72 और आएससी 12-32 जैसी बेहतर सोयाबीन किस्मों के विकास में प्रगति की।इसके अलावा—3 नई उन्नत किस्में विकसित6 नई उत्पादन और संरक्षण तकनीक3 जर्मप्लाज्म लाइन का पंजीकरणहर साल 100 से ज्यादा किसान डेमोकिसानों तक तकनीक पहुंचाने के लिए हर साल 100 से ज्यादा फील्ड डेमो किए गए। कांकेर जिले में जनजातीय किसानों के लिए विशेष योजनाओं के तहत भी काम किया गया।बीज उत्पादन में भी अच्छा प्रदर्शनकेंद्र ने प्रजनक बीज उत्पादन में करीब 90% लक्ष्य हासिल किया। साथ ही न्यूक्लियस बीज उत्पादन में भी उल्लेखनीय सफलता मिली।जलवायु के अनुसार खेती और नई तकनीककेंद्र ने ज्यादा उत्पादन और रोग प्रतिरोधक किस्मों के साथ-साथ पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और जलवायु के अनुकूल खेती पर भी काम किया।नई तकनीकों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन सुधारने में मदद मिली है।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी है।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी है।वैज्ञानिकों को अलग से भी सम्मानडॉ. सुनील कुमार नाग को सोयाबीन रिसर्च में योगदान के लिए “फेलो-2025” सम्मान मिला। वहीं डॉ. तापस चौधरी को नई तकनीक विकसित करने के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें बीज उपचार के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर काम किया गया है।2001 से चल रहा है यह केंद्ररायपुर में यह सोयाबीन अनुसंधान केंद्र वर्ष 2001 से संचालित है और देशभर में सोयाबीन उत्पादन बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में काम कर रहा है।यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम के लगातार प्रयास और किसानों के लिए किए जा रहे काम का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।




