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पुस्तक-लेखक की यात्रा एकान्त साधना से शुरू होती है : प्रो संजीव

आईआईएम रायपुर ने शैक्षणिक लेखन को प्रेरित करने हेतु पुस्तक लेखन कार्यशाला का आयोजन

रायपुर । भारतीय प्रबन्ध संस्थान रायपुर द्वारा “पाठ्यपुस्तकों एवं संदर्भ ग्रन्थों के लेखन के माध्यम से विद्वत्-पूंजी सृजन” विषय पर पुस्तक लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अनुसन्धान, प्रकाशन एवं पुस्तकालय समिति की ओर से आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य प्राध्यापकों एवं शोधकर्ताओं को प्रेरित करना था, ताकि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा एएसीएसबी प्रत्यायन के सिद्धान्तों के अनुरूप उच्च-कोटि की पाठ्यपुस्तकें, शोधग्रन्थ तथा संदर्भ ग्रन्थों का लेखन कर शैक्षणिक प्रकाशन में योगदान दे सकें।

कार्यक्रम में आईआईएम के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर संजीव प्रशर ने ऋषि वाल्मीकि और हनुमान जी द्वारा दीर्घकालीन लेखन साधना के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुस्तक-लेखक की यात्रा एकान्त साधना से आरंभ होती है, जहां विचारों को ग्रन्थ का रूप दिया जाता है। उन्होंने कहा, “भारतीय प्रबन्ध संस्थान रायपुर में हम ज्ञान के प्रसार और शैक्षणिक लेखन की शक्ति में विश्वास रखते हैं। यह कार्यशाला हमारे प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों के लिए अपने विचारों एवं विशेषज्ञता को पुस्तकों में रूपान्तरित कर भविष्य की प्रबन्धन शिक्षा को दिशा देने का अवसर है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा एएसीएसबी के लक्ष्यों के प्रति हमारे समर्पण को दर्शाता है।”

आईआईएम के ग्रन्थ मिलेंगे सभी संस्थानों में

आईआईएम के डीन प्रो. सत्यसीबा दास ने भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में शैक्षणिक लेखन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शीघ्र ही भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर के प्राध्यापकों के ग्रन्थ देश के हवाई अड्डों और अन्य प्रतिष्ठित स्थानों पर उपलब्ध होंगे। प्रोफेसर एम. कननधासन ने पुस्तक लेखन की प्रक्रिया पर अपने विचार व्यक्त किए और अनुसन्धान को प्रभावी प्रकाशनों में रूपान्तरित करने से सम्बन्धित महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किए। इस दौरान समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोजित चट्टोपाध्याय व अन्य उपस्थित थे।

तकनीकी सत्रों में हुई कई विषयों में चर्चा

पहले तकनीकी सत्र का संचालन भारतीय प्रबन्धन संस्थान बंगलूरु के प्रोफेसर सौरव मुखर्जी ने किया। उन्होंने शैक्षणिक लेखन के महत्व, पाठ्यपुस्तकों, शोध-ग्रन्थों, सम्पादित ग्रन्थों तथा व्यवहार-उन्मुख पुस्तकों सहित विभिन्न प्रकाशन रूपों पर विस्तृत चर्चा की। दूसरे सत्र में उन्होंने पाठ्यचर्या-आधारित लेखन तथा एमबीए, कार्यकारी एमबीए तथा पीएचडी कार्यक्रमों के लिए शिक्षण सामग्री के विकास पर प्रकाश डाला। स्प्रिंगर नेचर की वरिष्ठ सम्पादिका नूपुर सिंह ने शैक्षणिक पुस्तकों के विभिन्न स्वरूपों, वैज्ञानिक लेखन की प्रक्रिया तथा प्रकाशन की सर्वोत्तम पद्धतियों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रकाशन-नैतिकता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर भी विचार प्रस्तुत किए। नीरज करंदीकर (स्प्रिंगर नेचर) ने ई-पुस्तकों की आवश्यकता एवं वैश्विक स्तर पर उनके बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला।

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