राज्य के एससी/एसटी उद्यमी 15 दिसंबर तक कर सकते है आवेदन, प्रोग्राम 17 जनवरी से शुरू
रायपुर । भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए बिज़नेस एक्सेलरेटर प्रोग्राम शुरू किया है। यह कार्यक्रम उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, रणनीतिक निर्णय क्षमता, वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल उपकरणों के उपयोग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक एवं उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे वे जीविका-आधारित कारोबार से आगे बढ़कर दीर्घकालिक, विस्तारयोग्य और प्रतिस्पर्धी कारोबारी मॉडल विकसित कर सकेंगे। कार्यक्रम की कुल शुल्क राशि 99 हजार है, जिसे नेशनल एससी–एसटी हब द्वारा स्पॉन्सर किया गया है। प्रतिभागियों को केवल 7,500 पंजीकरण शुल्क देना होगा। प्रोग्राम के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक और 18 वर्ष या उससे अधिक आयु निर्धारित की गई है। साथ ही महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उद्यम पंजीकरण में “ट्रेडिंग” को मुख्य गतिविधि के रूप में दर्ज कराने वाले आवेदक इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। ऑनलाइन आवेदन 15 दिसंबर तक किए जा सकते है। कार्यक्रम की शुरुआत 17 जनवरी 2026 से निर्धारित की गई है।
72 घंटे की ट्रेनिंग प्रोग्राम, 18 घंटे मेंटरशिप
कार्यक्रम कैंपस में आयोजित कक्षाओं के साथ लाइव ऑनलाइन शिक्षण सत्र भी शामिल हैं। प्रतिभागियों को कुल 72 घंटे की ट्रेनिंग और 18 घंटे की एक्सपर्ट मेंटर्स से मेंटरशिप प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने बिज़नेस मॉडल को और सुदृढ़ करने, संभावनाशील बाज़ारों की पहचान करने, वित्तीय निर्णयों को अधिक वैज्ञानिक बनाने और संचालन क्षमता बढ़ाने हेतु डिजिटल टूल्स का उपयोग सीखने का अवसर मिलेगा। यह प्रशिक्षण संस्थान के प्राध्यापकों, उद्योग विशेषज्ञों और सफल व्यवसाय मार्गदर्शकों द्वारा दिया जाएगा। ताकि उद्यमियों को वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस दिशा और रणनीति विकसित करने में सहायता मिल सकें।
सफलता के लिए आवश्यक कौशल
आईआईएम के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पराशर ने कहा कि यह बिज़नेस एक्सेलरेटर प्रोग्राम अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए एक संरचित मार्ग प्रशस्त करता है। जिससे वे अपने व्यवसाय की मजबूत नींव तैयार कर आत्मविश्वास के साथ विस्तार कर सकें। उन्होंने कहा, अनेक उद्यमों में पर्याप्त संभावनाएं होती हैं, परंतु औपचारिक प्रबंधन प्रशिक्षण, सामरिक मार्गदर्शन और नेटवर्किंग के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पाते है। यह पहल उद्यमियों को आज के प्रतिस्पर्धी एवं परिवर्तनशील व्यवसायिक वातावरण में सफलता के लिए आवश्यक कौशल मिलेगा।




