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आईआईएम रायपुर में अंतरराष्ट्रीय केस सम्मेलन 30-31 जनवरी को, केस आमंत्रित

प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर

रायपुर । भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर अपने नया रायपुर परिसर में 30–31 जनवरी 2026 को पहला अंतरराष्ट्रीय केस सम्मेलन (आई.सी.सी. 2026) आयोजित करेगा। इस सम्मेलन में केस लेखक, शोधकर्ता, उद्योग नेतृत्व और नीति-निर्माता एक साथ आकर दो दिनों तक आधुनिक व्यावसायिक प्रथाओं तथा केस-आधारित शिक्षण पर विचार-विमर्श करेंगे। संस्थान ने शिक्षकों, शोधकर्ताओं, प्रायोगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों तथा विद्यार्थियों से मौलिक शिक्षण-केस आमंत्रित किए हैं। प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई है। सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य डॉ. वर्जीनिया बोडोलिका द्वारा दिया जाएगा।

संस्थान के “केस गृह” (चिर्प) का उद्देश्य भारत-केंद्रित केस विकास को बढ़ावा देना रहा है। व्यवहार-आधारित सीखने की बढ़ती महत्ता को देखते हुए, संस्थान ऐसे नए केस प्राप्त करना चाहता है जो वास्तविक व्यावसायिक समस्याएं, नीतिगत बदलाव, उभरती तकनीकें तथा भारतीय एवं वैश्विक व्यापारिक वातावरण के नए आयामों को दर्शाते हों। विस्तृत दिशा-निर्देश संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

प्रोफ़ेसर संजीव प्रशार ने कहा कि अच्छे केस वास्तविक अनुभवों से निकलते हैं। वे बोर्ड कक्ष, कारखाने और बाज़ार को सीधे कक्षा में ले आते हैं। हम सभी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और व्यवसायियों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपने अनुभवों और निर्णयों की उन कहानियों को साझा करें, जो भविष्य के प्रबंधकों को दिशा देंगी।

सम्मेलन संयोजक डॉ. प्रणीत कुमार रॉय ने कहा कि आईसीसी 2026 ऐसा मंच होगा जो केस-आधारित शोध और शिक्षण को नई ऊर्जा देगा। यहां शिक्षाविद, उद्योग नेता और नीति-निर्माता एक साथ उभरते बाज़ारों और उससे आगे की व्यावसायिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। यहां दी जाने वाली विस्तृत समीक्षा और सत्र-चर्चाएं केस लेखकों को अपने केस को और बेहतर बनाने में मदद करेंगी।

प्रस्तुत केस आधुनिक व्यावसायिक प्रथाएं, भारतीय सरकारी नीतियों का प्रभाव, प्रबंधन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, स्थिरता, उद्यमिता, शासन, वित्त तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय व्यापार रणनीतियां विषयों से संबंधित हो सकते हैं। चयनित केसों को सम्मेलन में प्रस्तुति का अवसर दिया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ केस पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा हेतु पात्र होंगे और उन्हें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में प्रकाशित होने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही एक “लघु-केस प्रतियोगिता” भी होगी जिसमें प्रबंध अध्ययन (एम.बी.ए./पी.जी.पी.) के विद्यार्थी अपने विश्लेषण एवं कथा-वाचन कौशल प्रदर्शित कर सकेंगे

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